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mahabharat 12.156.11: अपना क्रोध मुझ पर उतारो। क्रोध में आकर तुम मेरा क्या करोगे? पवन! यद्यपि तुम स्वयं महान् शक्तिशाली हो, फिर भी मैं तुमसे नहीं डरता॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.156.11 
मयि वै त्यज्यतां क्रोध: किं मे क्रुद्ध: करिष्यसि।
न ते बिभेमि पवन यद्यपि त्वं स्वयं प्रभु:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अपना क्रोध मुझ पर उतारो। क्रोध में आकर तुम मेरा क्या करोगे? पवन! यद्यपि तुम स्वयं महान् शक्तिशाली हो, फिर भी मैं तुमसे नहीं डरता॥ 11॥
 
'Vent your anger upon me. What will you do to me in anger? Pawan! Although you yourself are very powerful; still I am not afraid of you.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)