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mahabharat 12.156.10: भीष्म कहते हैं - हे राजन ! पवनदेव की यह बात सुनकर सेमुल हँसकर बोली - 'पवन ! आप क्रोधित होकर स्वयं ही अपना सारा पराक्रम प्रकट कर दीजिए ॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.156.10 
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तत: प्राह शाल्मलि: प्रहसन्निव।
पवन त्वं च मे क्रुद्धो दर्शयात्मानमात्मना॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन ! पवनदेव की यह बात सुनकर सेमुल हँसकर बोली - 'पवन ! आप क्रोधित होकर स्वयं ही अपना सारा पराक्रम प्रकट कर दीजिए ॥ 10॥
 
Bhishma says - O King! On hearing this from the Wind Lord, Semul laughed and said - 'Wind! You become angry and show all your power yourself.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)