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mahabharat 12.156.1: भीष्म कहते हैं - राजन! ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ नारदजी रेशम के वृक्ष से ऐसा कहकर वायुदेव के पास आए और उनसे अपनी सारी बातें कहीं।॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.156.1 
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा तु राजेन्द्र शाल्मलिं ब्रह्मवित्तम:।
नारद: पवने सर्वं शाल्मलेर्वाक्यमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ नारदजी रेशम के वृक्ष से ऐसा कहकर वायुदेव के पास आए और उनसे अपनी सारी बातें कहीं।॥1॥
 
Bhishma says: King! Having said this to the silk-cotton tree, Narada, the best amongst the knowers of Brahman, came to Vayudev and narrated all his words to him.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)