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mahabharat 12.154.8: समूह में यात्रा करने वाले व्यापारी, वन में रहने वाले तपस्वी तथा अन्य यात्री भी इस सुन्दर एवं उत्तम वृक्ष के नीचे निवास करते थे ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.154: नारदजीका सेमल-वृक्षसे प्रशंसापूर्वक प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 154: नारदजीका सेमल-वृक्षसे प्रशंसापूर्वक प्रश्न  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.154.8 
सार्थिका वणिजश्चापि तापसाश्च वनौकस:।
वसन्ति तत्र मार्गस्था: सुरम्ये नगसत्तमे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
समूह में यात्रा करने वाले व्यापारी, वन में रहने वाले तपस्वी तथा अन्य यात्री भी इस सुन्दर एवं उत्तम वृक्ष के नीचे निवास करते थे ॥8॥
 
Merchants traveling in groups, ascetics in the forest and other wayfarers also used to reside under this beautiful and excellent tree. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)