Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.154.1-3: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! यदि कोई कम बलवान, तुच्छ और छोटे कद का मनुष्य आसक्ति के कारण बलवान, सदा समीप रहने वाला, सहायता और हानि पहुँचाने में समर्थ और सदा परिश्रमी शत्रु के साथ अभिमान और अनुचित बातें कहे तथा शत्रुता करे, और वह बलवान शत्रु अत्यन्त कुपित होकर उस दुर्बल मनुष्य को गिराने के लिए उस पर आक्रमण करे, तो आक्रान्ता पुरुष को अपने बल का अवलम्बन करके उस आक्रमणकारी के साथ किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए? (जिससे उसकी रक्षा हो सके)॥1-3॥ | mahabharat अध्याय 12.154: नारदजीका सेमल-वृक्षसे प्रशंसापूर्वक प्रश्न । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! यदि कोई कम बलवान, तुच्छ और छोटे कद का मनुष्य आसक्ति के कारण बलवान, सदा समीप रहने वाला, सहायता और हानि पहुँचाने में समर्थ और सदा परिश्रमी शत्रु के साथ अभिमान और अनुचित बातें कहे तथा शत्रुता करे, और वह बलवान शत्रु अत्यन्त कुपित होकर उस दुर्बल मनुष्य को गिराने के लिए उस पर आक्रमण करे, तो आक्रान्ता पुरुष को अपने बल का अवलम्बन करके उस आक्रमणकारी के साथ किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए? (जिससे उसकी रक्षा हो सके)॥1-3॥
Yudhishthira asked - Grandfather! If a person who is less strong, insignificant and of small stature, out of attachment, boasts and says unworthy things and makes enmity with an enemy who is strong, always near, capable of helping and harming and is always industrious, and that strong enemy, being very angry, attacks that weak man to overthrow him, then how should the attacked man, relying on his own strength, deal with that attacker? (So that he can be protected)॥1-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥