Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.152.9: तीर्थस्थानों का दर्शन भी अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस विषय में विद्वान पुरुष राजा ययाति द्वारा गायी गई इस कथा का उदाहरण देते हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.152.9 
पुण्यदेशाभिगमनं पवित्रं परमं स्मृतम्।
अत्राप्युदाहरन्तीमां गाथां गीतां ययातिना॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तीर्थस्थानों का दर्शन भी अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस विषय में विद्वान पुरुष राजा ययाति द्वारा गायी गई इस कथा का उदाहरण देते हैं॥9॥
 
Visiting holy places of pilgrimage is also considered extremely sacred. In this regard, learned persons cite the example of this story sung by King Yayati.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)