Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.152.7: हे पृथ्वीनाथ! यज्ञ, दान, दया, वेद और सत्य - ये पाँच पवित्र माने गए हैं। इनके साथ ही विधिपूर्वक किया गया तप भी छठा पवित्र कर्म माना गया है। | mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे पृथ्वीनाथ! यज्ञ, दान, दया, वेद और सत्य - ये पाँच पवित्र माने गए हैं। इनके साथ ही विधिपूर्वक किया गया तप भी छठा पवित्र कर्म माना गया है।
Prithvinath! Yajna, charity, mercy, Vedas and truth - these five are considered sacred. Along with these, penance which is practised properly is also considered the sixth sacred deed. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥