Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.152.5: यदि कोई धनवान मनुष्य दानशील हो और कोई कंजूस या दरिद्र मनुष्य तपस्या करके धनी हो जाए, तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं समझी जाती; क्योंकि ऐसे पुरुषों का दान और तपस्या करके धनी हो जाना बहुत कठिन नहीं है ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
योऽदुर्लभो भवेद् दाता कृपणो वा तपोधन:।
अनाश्चर्यं तदित्याहुर्नातिदूरेण वर्तते॥ ५॥
अनुवाद
यदि कोई धनवान मनुष्य दानशील हो और कोई कंजूस या दरिद्र मनुष्य तपस्या करके धनी हो जाए, तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं समझी जाती; क्योंकि ऐसे पुरुषों का दान और तपस्या करके धनी हो जाना बहुत कठिन नहीं है ॥5॥
If a wealthy man is charitable and a miserly or poor man becomes rich in austerity, then it is not considered a matter of surprise; because it is not very difficult for such men to become rich in charity and austerity. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥