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mahabharat 12.152.39: इससे राजा जनमेजय के समस्त पाप नष्ट हो गए और वे प्रज्वलित अग्नि के समान प्रकाशित होने लगे। उन्हें सभी प्रकार के सौभाग्य प्राप्त हुए। जैसे पूर्ण चन्द्रमा आकाश में प्रवेश करता है, उसी प्रकार शत्रुसूदन जनमेजय पुनः अपने राज्य में आ गए। 39.   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.152.39 
तत: स राजा व्यपनीतकल्मष:
श्रेयोवृत: प्रज्वलिताग्निरूपवान्।
विवेश राज्यं स्वममित्रकर्षणो
यथा दिवं पूर्णवपुर्निशाकर:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
इससे राजा जनमेजय के समस्त पाप नष्ट हो गए और वे प्रज्वलित अग्नि के समान प्रकाशित होने लगे। उन्हें सभी प्रकार के सौभाग्य प्राप्त हुए। जैसे पूर्ण चन्द्रमा आकाश में प्रवेश करता है, उसी प्रकार शत्रुसूदन जनमेजय पुनः अपने राज्य में आ गए। 39.
 
Due to this, all the sins of King Janamejaya were destroyed and he started shining like a blazing fire. He got all kinds of good fortunes. Just like the full moon enters the sky, in the same way, Shatrusudan Janamejaya again entered his kingdom. 39.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि इन्द्रोतपारिक्षितीये द्विपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें इन्द्रोत और पारिक्षितका संवादविषयक एक सौ बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)