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mahabharat 12.152.37: जैसे प्रातःकाल सूर्य उदय होकर समस्त अंधकार को नष्ट कर देता है, वैसे ही शुभ कर्म करने वाला मनुष्य समस्त पापों का नाश कर देता है ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.152.37 
यथाऽऽदित्य: प्रातरुद्यंस्तम: सर्वं व्यपोहति।
कल्याणमाचरन्नेवं सर्वपापं व्यपोहति॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जैसे प्रातःकाल सूर्य उदय होकर समस्त अंधकार को नष्ट कर देता है, वैसे ही शुभ कर्म करने वाला मनुष्य समस्त पापों का नाश कर देता है ॥37॥
 
Just as the sun rises in the morning and destroys all darkness, similarly a man who performs good deeds destroys all his sins. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)