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mahabharat 12.152.30: मनु ने कहा है कि यदि कोई मनुष्य अघमर्षण मन्त्र का तीन बार जप करते हुए जल में गोता लगाता है, तो उसे अश्वमेध यज्ञ में स्नान करने का फल मिलता है ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.152.30 
अपि चाप्सु निमज्जेत जपंस्त्रिरघमर्षणम्।
यथाश्वमेधावभृथस्तथा तन्मनुरब्रवीत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मनु ने कहा है कि यदि कोई मनुष्य अघमर्षण मन्त्र का तीन बार जप करते हुए जल में गोता लगाता है, तो उसे अश्वमेध यज्ञ में स्नान करने का फल मिलता है ॥30॥
 
Manu has said that if a person dives into water while chanting the Aghamarshan mantra thrice, he gets the fruits of taking a bath in the Ashwamedha sacrifice. ॥30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)