Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.152.3: लोग मानते हैं कि जो राजा बहुत दिनों तक क्रोधी स्वभाव का रहता है, वह अपना सब कुछ जलाकर राख कर देता है। परन्तु यह भी कम आश्चर्य की बात नहीं है कि आप अभी भी धर्म का ध्यान रख रहे हैं।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.152.3 
कृत्स्नं नूनं स दहति इति लोको व्यवस्यति।
यत्र त्वं तादृशो भूत्वा धर्ममेवानुपश्यसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
लोग मानते हैं कि जो राजा बहुत दिनों तक क्रोधी स्वभाव का रहता है, वह अपना सब कुछ जलाकर राख कर देता है। परन्तु यह भी कम आश्चर्य की बात नहीं है कि आप अभी भी धर्म का ध्यान रख रहे हैं।॥3॥
 
People believe that a king who for a long time has a fiery temper will certainly burn everything belonging to him to ashes. But the fact that you are still keeping an eye on Dharma is no less surprising. ॥3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)