Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.152.29: यदि कोई प्राणी-हत्या करने वाला व्यक्ति उसी जाति के उतने ही प्राणियों को मरने से बचा ले, अर्थात् उन्हें मरने के भय से मुक्त कर दे, तो वह उनकी हत्या के पाप से मुक्त हो जाता है ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.152.29 
यावत: प्राणिनो हन्यात् तज्जातीयांस्तु तावत:।
प्रमीयमानानुन्मोच्य प्राणिहा विप्रमुच्यते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई प्राणी-हत्या करने वाला व्यक्ति उसी जाति के उतने ही प्राणियों को मरने से बचा ले, अर्थात् उन्हें मरने के भय से मुक्त कर दे, तो वह उनकी हत्या के पाप से मुक्त हो जाता है ॥29॥
 
If a person who kills animals saves the same number of animals of the same species from death, i.e., relieves them from the danger of dying, then he is freed from the sin of killing them. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)