Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.152.25-26: सुख चाहने वाले मनुष्य को शुभ कर्म करने चाहिए । जो मनुष्य सुगंधित पदार्थों का सेवन करते हैं, उनके शरीर से सुगंध निकलती है और जो मनुष्य सदैव दुर्गंधयुक्त पदार्थों का सेवन करते हैं, उनके शरीर से दुर्गंध फैलती है । जो मनुष्य तप में तत्पर रहता है, वह सभी पापों से तुरंत मुक्त हो जाता है ॥25-26॥ | mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुख चाहने वाले मनुष्य को शुभ कर्म करने चाहिए । जो मनुष्य सुगंधित पदार्थों का सेवन करते हैं, उनके शरीर से सुगंध निकलती है और जो मनुष्य सदैव दुर्गंधयुक्त पदार्थों का सेवन करते हैं, उनके शरीर से दुर्गंध फैलती है । जो मनुष्य तप में तत्पर रहता है, वह सभी पापों से तुरंत मुक्त हो जाता है ॥25-26॥
A man who desires happiness should perform auspicious deeds. Those who consume fragrant substances, their bodies emit fragrance and those who always consume foul-smelling substances, they spread foul smell from their bodies. A man who is devoted to penance, immediately gets free from all sins. ॥25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥