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mahabharat 12.152.24: आज से केवल धर्म का पालन करने का संकल्प करने से वह तीसरी बार किए गए पापों से मुक्त हो जाता है और जो मनुष्य तीर्थस्थानों का दर्शन करता है, वह अनेक बार किए गए असंख्य पापों से मुक्त हो जाता है ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.152.24 
करिष्ये धर्ममेवेति तृतीयात् परिमुच्यते।
शुचिस्तीर्थान्यनुचरन् बहुत्वात्परिमुच्यते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
आज से केवल धर्म का पालन करने का संकल्प करने से वह तीसरी बार किए गए पापों से मुक्त हो जाता है और जो मनुष्य तीर्थस्थानों का दर्शन करता है, वह अनेक बार किए गए असंख्य पापों से मुक्त हो जाता है ॥24॥
 
By vowing to follow only Dharma from today onwards, he is relieved of the sins committed for the third time. And a person who visits holy places of pilgrimage is freed from the numerous sins committed many times. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)