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mahabharat 12.152.2: यह बड़े आश्चर्य की बात है कि एक राजा, जो पहले कठोर स्वभाव का होता है, बाद में कोमल स्वभाव धारण कर लेता है और अपने अच्छे आचरण से सभी प्राणियों पर कृपा करता है ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.152.2 
पुरस्ताद् दारुणो भूत्वा सुचित्रतरमेव तत्।
अनुगृह्णाति भूतानि स्वेन वृत्तेन पार्थिव:॥ २॥
 
 
अनुवाद
यह बड़े आश्चर्य की बात है कि एक राजा, जो पहले कठोर स्वभाव का होता है, बाद में कोमल स्वभाव धारण कर लेता है और अपने अच्छे आचरण से सभी प्राणियों पर कृपा करता है ॥2॥
 
It is very surprising that a king, though initially of a harsh nature, later adopts a gentle nature and by his good behaviour bestows favour on all beings. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)