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mahabharat 12.152.15: इस संदर्भ में भी सत्यवान् द्वारा रचित इन कथाओं के उदाहरण दिए गए हैं। जैसे बालक राग-द्वेष से रहित होने के कारण सदैव सत्यवादी होता है। वह न कोई पुण्य कर्म करता है, न कोई पाप। उसी प्रकार प्रत्येक महापुरुष को भी ऐसा ही होना चाहिए॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.152.15 
अत्राप्युदाहरन्तीमा गाथा: सत्यवता कृता:।
यथा कुमार: सत्यो वै नैव पुण्यो न पापकृत् ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस संदर्भ में भी सत्यवान् द्वारा रचित इन कथाओं के उदाहरण दिए गए हैं। जैसे बालक राग-द्वेष से रहित होने के कारण सदैव सत्यवादी होता है। वह न कोई पुण्य कर्म करता है, न कोई पाप। उसी प्रकार प्रत्येक महापुरुष को भी ऐसा ही होना चाहिए॥ 15॥
 
In this context also, examples of these stories created by Satyavan are given. Just as a child is always truthful because he is free from love and hatred. He neither does any good deed nor any sin. Similarly, every great man should also be like this.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)