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mahabharat 12.152.10: जो मनुष्य दीर्घायु की इच्छा रखता है, उसे चाहिए कि वह बड़े यत्न से यज्ञ करे और फिर उसे त्यागकर तप में लग जाए ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.152.10 
यो मर्त्य: प्रतिपद्येत आयुर्जीवितमात्मन:।
यज्ञमेकान्तत: कृत्वा तत् संन्यस्य तपश्चरेत् ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य दीर्घायु की इच्छा रखता है, उसे चाहिए कि वह बड़े यत्न से यज्ञ करे और फिर उसे त्यागकर तप में लग जाए ॥10॥
 
A person who desires a long life should perform the sacrifice with great effort and then abandon it and engage in austerity. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)