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mahabharat 12.152.1: शौनक बोले- राजन! आपने ऐसी प्रतिज्ञा की है, इससे प्रतीत होता है कि आपका मन पाप से विमुख हो गया है; अतः मैं आपको धर्म का उपदेश करूँगा; क्योंकि आप धनवान, महापराक्रमी और संतोषी हैं। साथ ही आप स्वयं भी धर्म का ध्यान रखते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 152: इन्द्रोतका जनमेजयको धर्मोपदेश करके उनसे अश्वमेधयज्ञका अनुष्ठान कराना तथा निष्पाप राजाका पुन: अपने राज्यमें प्रवेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.152.1 
शौनक उवाच
तस्मात् तेऽहं प्रवक्ष्यामि धर्ममावृतचेतसे।
श्रीमान् महाबलस्तुष्ट: स्वयं धर्ममवेक्षसे॥ १॥
 
 
अनुवाद
शौनक बोले- राजन! आपने ऐसी प्रतिज्ञा की है, इससे प्रतीत होता है कि आपका मन पाप से विमुख हो गया है; अतः मैं आपको धर्म का उपदेश करूँगा; क्योंकि आप धनवान, महापराक्रमी और संतोषी हैं। साथ ही आप स्वयं भी धर्म का ध्यान रखते हैं।
 
Shaunak said- King! You have made such a promise, it seems that your mind has turned away from sin; therefore I will preach you Dharma; because you are wealthy, very powerful and contented. Also you yourself keep an eye on Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)