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mahabharat 12.151.5: मैं ब्राह्मणों का बड़ा भक्त हूँ; अतः आपसे पुनः प्रार्थना करता हूँ कि मेरे कुल का कुछ भाग अवश्य बचे, सम्पूर्ण कुल पराजित या नष्ट न हो॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.151.5 
महानासं ब्राह्मणानां भूयो वक्ष्यामि साम्प्रतम्।
अस्तु शेषं कुलस्यास्य मा पराभूदिदं कुलम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मैं ब्राह्मणों का बड़ा भक्त हूँ; अतः आपसे पुनः प्रार्थना करता हूँ कि मेरे कुल का कुछ भाग अवश्य बचे, सम्पूर्ण कुल पराजित या नष्ट न हो॥5॥
 
‘I have been a great devotee of Brahmins; therefore, I request you once again that some part of my clan must remain. The entire clan should not be defeated or destroyed.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)