Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.151.3-4: मुझे तो यमराज से भी घोर भय होने वाला है। यह बात मेरे हृदय में काँटे की तरह चुभ रही है। इसे हृदय से निकाले बिना मैं कैसे रह सकूँगा? अतः हे शौनक! आप सब क्रोध त्यागकर मेरी रक्षा का कोई उपाय बताइए॥ 3-4॥ | mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुझे तो यमराज से भी घोर भय होने वाला है। यह बात मेरे हृदय में काँटे की तरह चुभ रही है। इसे हृदय से निकाले बिना मैं कैसे रह सकूँगा? अतः हे शौनक! आप सब क्रोध त्यागकर मेरी रक्षा का कोई उपाय बताइए॥ 3-4॥
'I am definitely going to be in grave fear even from Yamraj. This thing is piercing my heart like a thorn. How will I be able to live without removing this from my heart? Therefore, O Shaunak! Please give up all anger and tell me some way to be saved.॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥