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mahabharat 12.151.19: लोग मुझे अधार्मिक कहेंगे। मेरे हितैषी मित्र मुझे त्याग देंगे और यह सुनकर कि तुम धर्म का उपदेश कर रहे हो, मेरे मित्र मुझ पर अत्यन्त क्रोधित होंगे॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.151.19 
वक्ष्यन्ति मामधर्मज्ञं त्यक्ष्यन्ति सुहृदो जना:।
ता वाच: सुहृद: श्रुत्वा संज्वरिष्यन्ति मे भृशम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
लोग मुझे अधार्मिक कहेंगे। मेरे हितैषी मित्र मुझे त्याग देंगे और यह सुनकर कि तुम धर्म का उपदेश कर रहे हो, मेरे मित्र मुझ पर अत्यन्त क्रोधित होंगे॥19॥
 
People will call me a non-religious person. My well-wishing friends will abandon me and on hearing that you are preaching Dharma, my friends will get very angry with me.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)