Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.151.18: मैं तुमसे कुछ भी लेना नहीं चाहता। यदि सभी प्राणी मेरी निन्दा करते रहें, रोते रहें और मुझे कोसते रहें, तो भी मैं उनकी उपेक्षा करके केवल धर्म के लिए तुम्हें अपने पास आने के लिए आमंत्रित करता हूँ॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽहं न केनचिच्चार्थी त्वां च धर्मादुपाह्वये।
क्रोशतां सर्वभूतानां हाहा धिगिति जल्पताम्॥ १८॥
अनुवाद
मैं तुमसे कुछ भी लेना नहीं चाहता। यदि सभी प्राणी मेरी निन्दा करते रहें, रोते रहें और मुझे कोसते रहें, तो भी मैं उनकी उपेक्षा करके केवल धर्म के लिए तुम्हें अपने पास आने के लिए आमंत्रित करता हूँ॥18॥
I do not wish to take anything from you. Even if all beings keep on speaking ill of me, keep on crying and cursing me, I ignore them and invite you to come near me only for the sake of Dharma.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥