Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.151.17: हे राजन! मैं तुम्हें यहाँ भय, दीनता या लोभ के कारण नहीं बुला रहा हूँ। तुम इन ब्राह्मणों सहित मेरे सत्य वचनों को, जो दिव्य वाणी के समान हैं, खुले कानों से सुनो। | mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न भयान्न च कार्पण्यान्न लोभात् त्वामुपाह्वये।
तां मे दैवीं गिरं सत्यां शृणु त्वं ब्राह्मणै: सह॥ १७॥
अनुवाद
हे राजन! मैं तुम्हें यहाँ भय, दीनता या लोभ के कारण नहीं बुला रहा हूँ। तुम इन ब्राह्मणों सहित मेरे सत्य वचनों को, जो दिव्य वाणी के समान हैं, खुले कानों से सुनो।
O King! I am not calling you here out of fear, humility or greed. You along with these Brahmins should listen to my true words which are like divine voices with open ears. 17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥