Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.151.16: शौनक बोले - नरेश्वर! मैं आपके अहंकार और अभिमान का नाश करके आपको अपना प्रिय बनाना चाहता हूँ। आप सदैव धर्म का स्मरण करते हुए समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए कार्य करें। 16॥ | mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शौनक उवाच
छित्त्वां दम्भं च मानं च प्रीतिमिच्छामि ते नृप।
सर्वभूतहितं तिष्ठ धर्मं चैव प्रतिस्मरन्॥ १६॥
अनुवाद
शौनक बोले - नरेश्वर! मैं आपके अहंकार और अभिमान का नाश करके आपको अपना प्रिय बनाना चाहता हूँ। आप सदैव धर्म का स्मरण करते हुए समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए कार्य करें। 16॥
Shaunak said – Nareshwar! I want to endear you to you by destroying your arrogance and pride. You should always remember the Dharma and work for the welfare of all living beings. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥