Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.151.14: पिता जी! जो कुछ भी क्रोध रहित होकर ब्राह्मणों की सेवा के लिए किया जाता है, वह केवल आध्यात्मिक लाभ के लिए होता है। अथवा यदि तुम्हें अपने पापों का पश्चाताप हो, तो तुम्हें सदैव धर्म पर दृष्टि रखनी चाहिए। 14. | mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पिता जी! जो कुछ भी क्रोध रहित होकर ब्राह्मणों की सेवा के लिए किया जाता है, वह केवल आध्यात्मिक लाभ के लिए होता है। अथवा यदि तुम्हें अपने पापों का पश्चाताप हो, तो तुम्हें सदैव धर्म पर दृष्टि रखनी चाहिए। 14.
Father! Whatever is done for the service of brahmanas without anger is only for the spiritual benefit. Or if you feel remorse for your sins, then you should always keep your eyes on Dharma. 14.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥