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mahabharat 12.150.19: हे राजन! तुम सोचते हो कि जब इस लोक में तुम्हें अपने पापों का फल नहीं मिलता, तो परलोक का अस्तित्व कैसे हो सकता है? अतः इस मान्यता के विपरीत, जब तुम यमलोक में जाओगे, तब यमराज के दूत तुम्हें इन सब बातों का स्मरण कराएँगे॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.150.19 
यदिदं मन्यसे राजन् नायमस्ति कुत: पर:।
प्रतिस्मारयितारस्त्वां यमदूता यमक्षये॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तुम सोचते हो कि जब इस लोक में तुम्हें अपने पापों का फल नहीं मिलता, तो परलोक का अस्तित्व कैसे हो सकता है? अतः इस मान्यता के विपरीत, जब तुम यमलोक में जाओगे, तब यमराज के दूत तुम्हें इन सब बातों का स्मरण कराएँगे॥19॥
 
‘O King! You think that when you do not get the result of your sins in this world, then how can there be any existence of the next world? So contrary to this belief, when you go to Yamaloka, the messengers of Yamaraja will remind you of all these things.॥ 19॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि इन्द्रोतपारिक्षितीयसंवादे पञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें इन्द्रोत और पारिक्षितका संवादविषयक एक सौ पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)