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mahabharat 12.150.16: जिनकी पूजा से स्वर्ग, आयु, यश और संतान प्राप्त होती है, उन ब्राह्मणों से तुम सदैव द्वेष करते हो। तुम्हारा जीवन व्यर्थ है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.150.16 
यान् पूजयन्तो विन्दन्ति स्वर्गमायुर्यश: प्रजा:।
तेषु त्वं सततं द्वेष्टा ब्राह्मणेषु निरर्थक:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जिनकी पूजा से स्वर्ग, आयु, यश और संतान प्राप्त होती है, उन ब्राह्मणों से तुम सदैव द्वेष करते हो। तुम्हारा जीवन व्यर्थ है॥16॥
 
'You always hate those brahmins whose worship grants them heaven, long life, fame and progeny. Your life is futile.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)