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mahabharat 12.150.14: माता-पिता तप, भगवान् की पूजा, नमस्कार और सहनशीलता या क्षमा आदि के द्वारा पुत्रों की प्राप्ति की इच्छा रखते हैं और प्राप्त पुत्रों से परम कल्याण की कामना करते हैं ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.150.14 
बहुकल्याणमिच्छन्ति ईहन्ते पितर: सुतान्।
तपसा दैवतेज्याभिर्वन्दनेन तितिक्षया॥ १४॥
 
 
अनुवाद
माता-पिता तप, भगवान् की पूजा, नमस्कार और सहनशीलता या क्षमा आदि के द्वारा पुत्रों की प्राप्ति की इच्छा रखते हैं और प्राप्त पुत्रों से परम कल्याण की कामना करते हैं ॥14॥
 
Parents desire to have sons through austerity, worship of God, salutations and tolerance or forgiveness, etc., and they desire to receive the ultimate welfare from the sons they have got. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)