Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.150.13: राजन्! तुम्हारा जीवन व्यर्थ और दुःखों से भरा है। तुम पाप करने के लिए ही जन्मे हो। तुम बुरे कर्म करने के लिए ही जन्मे हो।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.150.13 
मोघं ते जीवितं राजन् परिक्लिष्टं च जीवसि।
पापायैव हि सृष्टोऽसि कर्मणे हि यवीयसे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजन्! तुम्हारा जीवन व्यर्थ और दुःखों से भरा है। तुम पाप करने के लिए ही जन्मे हो। तुम बुरे कर्म करने के लिए ही जन्मे हो।॥13॥
 
‘King! Your life is futile and full of suffering. You are born to commit sins. You are born to do bad deeds.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)