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श्लोक  12.150.1 
युधिष्ठिर उवाच
अबुद्धिपूर्वं यत् पापं कुर्याद् भरतसत्तम।
मुच्यते स कथं तस्मादेतत् सर्वं वदस्व मे॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे भरतश्रेष्ठ! यदि कोई मनुष्य अनजाने में कोई पाप कर दे, तो उससे कैसे मुक्त हो सकता है? कृपया मुझे यह सब बताइए।"
 
Yudhishthira asked, "O best of the Bharatas! If a man commits a sin unknowingly, how can he be freed from it? Please tell me all this."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)