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mahabharat 12.15.9: यदि ब्राह्मण कोई अपराध करता है, तो उसके लिए दण्ड यह है कि उसे शब्दों से अपमानित किया जाए, क्षत्रिय के लिए दण्ड यह है कि उसे केवल भोजन देकर काम कराया जाए, वैश्य के लिए दण्ड यह है कि उससे जुर्माने के रूप में धन वसूला जाए, परन्तु शूद्र दण्ड से रहित कहा गया है। उसकी सेवा लेने के अतिरिक्त उसके लिए और कोई दण्ड नहीं है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.15.9 
वाचा दण्डो ब्राह्मणानां क्षत्रियाणां भुजार्पणम्।
दानदण्डा: स्मृता वैश्या निर्दण्ड: शूद्र उच्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यदि ब्राह्मण कोई अपराध करता है, तो उसके लिए दण्ड यह है कि उसे शब्दों से अपमानित किया जाए, क्षत्रिय के लिए दण्ड यह है कि उसे केवल भोजन देकर काम कराया जाए, वैश्य के लिए दण्ड यह है कि उससे जुर्माने के रूप में धन वसूला जाए, परन्तु शूद्र दण्ड से रहित कहा गया है। उसकी सेवा लेने के अतिरिक्त उसके लिए और कोई दण्ड नहीं है॥9॥
 
If a Brahmin commits a crime, the punishment for him is to insult him with words, the punishment for a Kshatriya is to make him work by paying him only food, the punishment for a Vaishya is to collect money from him in the form of fines, but a Shudra is said to be without punishment. There is no other punishment for him except taking his service.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)