Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.15.7: बहुत से लोग केवल दण्ड के भय से ही एक-दूसरे को नहीं खाते। यदि दण्ड उनकी रक्षा न करता, तो सब लोग घोर अंधकार में डूब जाते ॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दण्डस्यैव भयादेके न खादन्ति परस्परम्।
अन्धे तमसि मज्जेयुर्यदि दण्डो न पालयेत्॥ ७॥
अनुवाद
बहुत से लोग केवल दण्ड के भय से ही एक-दूसरे को नहीं खाते। यदि दण्ड उनकी रक्षा न करता, तो सब लोग घोर अंधकार में डूब जाते ॥7॥
Many people do not eat each other only because of the fear of punishment. If punishment did not protect them, then everyone would be plunged into deep darkness. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥