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mahabharat 12.15.53: हे कुन्तीपुत्र! यज्ञ करो, दान दो, प्रजा की रक्षा करो और धर्म का पालन करो। हे कुन्तीपुत्र! शत्रुओं का संहार करो और मित्रों की रक्षा करो॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  12.15.53 
यज देहि प्रजां रक्ष धर्मं समनुपालय।
अमित्रान् जहि कौन्तेय मित्राणि परिपालय॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! यज्ञ करो, दान दो, प्रजा की रक्षा करो और धर्म का पालन करो। हे कुन्तीपुत्र! शत्रुओं का संहार करो और मित्रों की रक्षा करो॥ 53॥
 
Perform sacrifices, give donations, protect the people and follow the Dharma. O son of Kunti, kill your enemies and protect your friends. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)