vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन
»
श्लोक 47
श्लोक
12.15.47
सुखेन धर्मं श्रीमन्तश्चरन्ति शुचिवासस:।
संवर्षन्त: फलैर्दानैर्भुञ्जानाश्चान्नमुत्तमम्॥ ४७॥
अनुवाद
धनवान पुरुष शुद्ध वस्त्र धारण करके सुखपूर्वक धर्म का आचरण करते हैं और उत्तम भोजन करते हैं, फल और अन्न की वर्षा करते हैं ॥47॥
Wealthy men, dressed in pure clothes, happily practice Dharma and eat the best of food, showering fruits and grains. ॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×