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mahabharat 12.15.47: धनवान पुरुष शुद्ध वस्त्र धारण करके सुखपूर्वक धर्म का आचरण करते हैं और उत्तम भोजन करते हैं, फल और अन्न की वर्षा करते हैं ॥47॥   |   mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.15.47 
सुखेन धर्मं श्रीमन्तश्चरन्ति शुचिवासस:।
संवर्षन्त: फलैर्दानैर्भुञ्जानाश्चान्नमुत्तमम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
धनवान पुरुष शुद्ध वस्त्र धारण करके सुखपूर्वक धर्म का आचरण करते हैं और उत्तम भोजन करते हैं, फल और अन्न की वर्षा करते हैं ॥47॥
 
Wealthy men, dressed in pure clothes, happily practice Dharma and eat the best of food, showering fruits and grains. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)