श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.15.37 
न ब्रह्मचार्यधीयीत कल्याणी गौर्न दुह्यते।
न कन्योद्वहनं गच्छेद् यदि दण्डो न पालयेत् ॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
यदि दण्ड से मर्यादा की रक्षा न हो तो ब्रह्मचारी वेदों का अध्ययन नहीं करेगा, साधारण गाय का दूध नहीं निकाला जाएगा और कन्या का विवाह नहीं होगा। 37.
 
If punishment does not protect dignity then a celibate will not engage in the study of the Vedas, a simple cow will not be milked and a girl will not get married. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)