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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन
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श्लोक 36
श्लोक
12.15.36
यदि दण्डान्न बिभ्येयुर्वयांसि श्वापदानि च।
अद्यु: पशून् मनुष्यांश्च यज्ञार्थानि हवींषि च॥ ३६॥
अनुवाद
यदि पक्षी और हिंसक जीव दण्ड से न डरते तो वे पशुओं, मनुष्यों और यज्ञ के लिए रखी हुई बलियों को खा जाते ॥36॥
If birds and predatory creatures were not afraid of punishment, they would have eaten animals, humans and the sacrifices kept for yagya. 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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