सर्वो दण्डजितो लोको दुर्लभो हि शुचिर्जन:।
दण्डस्य हि भयाद् भीतो भोगायैव प्रवर्तते॥ ३४॥
अनुवाद
दण्ड के कारण ही सारा जगत् पथभ्रष्ट रहता है; क्योंकि स्वभावतः ही पूर्णतः शुद्ध पुरुष मिलना कठिन है। दण्ड से भयभीत मनुष्य ही मर्यादा का पालन करने में प्रवृत्त होता है। 34॥
The whole world remains on the path due to punishment; Because naturally it is difficult to find a completely pure person. Only a person who is afraid of punishment is inclined to follow decorum. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥