श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.15.30 
दण्डश्चेन्न भवेल्लोके विनश्येयुरिमा: प्रजा:।
जले मत्स्यानिवाभक्ष्यन् दुर्बलान् बलवत्तरा:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
यदि इस संसार में दण्ड न हो, तो यह समस्त प्रजा नष्ट हो जाएगी; और जैसे जल में बड़ी मछलियाँ छोटी मछलियों को खा जाती हैं, वैसे ही बलवान प्राणी दुर्बल प्राणियों को अपना भोजन बना लेंगे ॥30॥
 
If there is no punishment in this world, then this entire population will be destroyed; and just like big fishes eat small fishes in water, in the same way the strong creatures will make the weak creatures their food. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)