श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.15.29 
दण्डनीत्यां प्रणीतायां सर्वे सिद्धॺन्त्युपक्रमा:।
कौन्तेय सर्वभूतानां तत्र मे नास्ति संशय:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र! मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि दण्डनीति का उचित प्रयोग होने पर समस्त प्राणियों के सभी कार्य अच्छी तरह से सिद्ध हो जाते हैं ॥29॥
 
Kunti's son! I have no doubt that when the policy of punishment is properly applied, all the tasks of all beings are accomplished well. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)