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mahabharat 12.15.28: मनुष्य धरती खोदकर तथा औषधीय जड़ी-बूटियाँ, वृक्ष, लताएँ, पक्षी और पशु आदि काटकर यज्ञ करते हैं, और वे स्वर्ग भी जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.15.28 
भूमिं भित्वौषधीश्छित्त्वा वृक्षादीनण्डजान् पशून्।
मनुष्यास्तन्वते यज्ञांस्ते स्वर्गं प्राप्नुवन्ति च॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य धरती खोदकर तथा औषधीय जड़ी-बूटियाँ, वृक्ष, लताएँ, पक्षी और पशु आदि काटकर यज्ञ करते हैं, और वे स्वर्ग भी जाते हैं।
 
Men perform sacrifices by digging the earth and cutting down medicinal herbs, trees, creepers, birds and animals, and they even go to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)