Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.15.25: जल में बहुत से जीव-जंतु हैं, पृथ्वी पर बहुत से कीड़े-मकोड़े हैं और वृक्षों के फलों में बहुत से जीव-जंतु हैं। ऐसा कोई मनुष्य नहीं है जो इनमें से किसी को भी न मारता हो। ये सब जीवन-निर्वाह के अतिरिक्त और क्या हैं?॥25॥   |   mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.15.25 
उदके बहव: प्राणा: पृथिव्यां च फलेषु च।
न च कश्चिन्न तान् हन्ति किमन्यत् प्राणयापनात् ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जल में बहुत से जीव-जंतु हैं, पृथ्वी पर बहुत से कीड़े-मकोड़े हैं और वृक्षों के फलों में बहुत से जीव-जंतु हैं। ऐसा कोई मनुष्य नहीं है जो इनमें से किसी को भी न मारता हो। ये सब जीवन-निर्वाह के अतिरिक्त और क्या हैं?॥25॥
 
There are many creatures in the water, many insects on the earth and in the fruits of trees. There is no human being who never kills any of these. What is all this except for the sustenance of life?॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)