श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.15.20 
न हि पश्यामि जीवन्तं लोके कञ्चिदहिंसया।
सत्त्वै: सत्त्वा हि जीवन्ति दुर्बलैर्बलवत्तरा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मैं इस संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं देखता जो अहिंसा के द्वारा अपनी जीविका चलाता हो। क्योंकि बलवान प्राणी दुर्बल प्राणियों के द्वारा ही अपनी जीविका चलाते हैं।
 
I do not see any person in this world who earns his living through non-violence. Because the strong creatures earn their living through the weak creatures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)