Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.15.18-19: परन्तु ब्रह्मा, धाता और पुष्की किसी भी प्रकार से पूजा नहीं करते; क्योंकि वे समस्त जीवों के प्रति समभाव रखने के कारण मध्यस्थ, जितेन्द्रिय और शांतिप्रिय हैं। केवल शान्त स्वभाव वाले ही अपने समस्त कार्यों में इन धाता आदि की पूजा करते हैं। | mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ब्रह्माणं न धातारं न पूषाणं कथंचन॥ १८॥
मध्यस्थान् सर्वभूतेषु दान्तान् शमपरायणान्।
यजन्ते मानवा: केचित् प्रशान्ता: सर्वकर्मसु॥ १९॥
अनुवाद
परन्तु ब्रह्मा, धाता और पुष्की किसी भी प्रकार से पूजा नहीं करते; क्योंकि वे समस्त जीवों के प्रति समभाव रखने के कारण मध्यस्थ, जितेन्द्रिय और शांतिप्रिय हैं। केवल शान्त स्वभाव वाले ही अपने समस्त कार्यों में इन धाता आदि की पूजा करते हैं।
But Brahma, Dhata and Pushaki do not worship in any way; Because he is a mediator, Jitendriya and peace-loving due to his equanimity towards all living beings. Only those who have a peaceful nature worship these Dhata etc. in all their activities.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥