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mahabharat 12.148.9-10h: इस प्रकार अनेक प्रकार से विलाप करता हुआ वह श्रद्धालु कबूतर महान शोक में डूबकर उसी प्रज्वलित अग्नि में समा गया ॥9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  12.148.9-10h 
एवं विलप्य बहुधा करुणं सा सुदु:खिता॥ ९॥
पतिव्रता सम्प्रदीप्तं प्रविवेश हुताशनम्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अनेक प्रकार से विलाप करता हुआ वह श्रद्धालु कबूतर महान शोक में डूबकर उसी प्रज्वलित अग्नि में समा गया ॥9 1/2॥
 
Having wailed in many pitiful ways in this manner, the faithful dove, being in great sorrow, merged into the same blazing fire. ॥9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)