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mahabharat 12.148.8-9h: नाथ! आपके बिना इस जीवन का क्या उपयोग है? कौन पतिव्रता स्त्री अपने पति के बिना रह सकती है?॥8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  12.148.8-9h 
न कार्यमिह मे नाथ जीवितेन त्वया विना॥ ८॥
पतिहीना तु का नारी सती जीवितुमुत्सहेत्।
 
 
अनुवाद
नाथ! आपके बिना इस जीवन का क्या उपयोग है? कौन पतिव्रता स्त्री अपने पति के बिना रह सकती है?॥8 1/2॥
 
'Nath! What is the use of this life without you? Which faithful woman can live without her husband?॥ 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)