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mahabharat 12.148.1: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! शिकारी के चले जाने पर कबूतरी को अपने पति का स्मरण हो आया और वह अत्यन्त दुःखी हो गयी तथा दुःख के मारे रोने-चीखने लगी।   |   mahabharat अध्याय 12.148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.148.1 
भीष्म उवाच
ततो गते शाकुनिके कपोती प्राह दु:खिता।
संस्मृत्य सा च भर्तारं रुदती शोककर्शिता॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! शिकारी के चले जाने पर कबूतरी को अपने पति का स्मरण हो आया और वह अत्यन्त दुःखी हो गयी तथा दुःख के मारे रोने-चीखने लगी।
 
Bhishma says - Yudhishthira! After the hunter left, the pigeon remembered her husband and became very sad and started crying and wailing in grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)