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mahabharat 12.147.7-8h: ‘मैं भूख, प्यास और गर्मी की पीड़ा सहन करके अपने शरीर को इतना दुर्बल कर दूँगा कि मेरे शरीर में फैली हुई नसें स्पष्ट दिखाई देने लगेंगी। मैं बार-बार नाना प्रकार के व्रत और पुण्यकर्म करूँगा, जिनसे मेरा परलोक सुधरेगा।॥7 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.147: बहेलियेका वैराग्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 147: बहेलियेका वैराग्य  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  12.147.7-8h 
क्षुत्पिपासातपसह: कृशो धमनिसंतत:॥ ७॥
उपवासैर्बहुविधैश्चरिष्ये पारलौकिकम्।
 
 
अनुवाद
‘मैं भूख, प्यास और गर्मी की पीड़ा सहन करके अपने शरीर को इतना दुर्बल कर दूँगा कि मेरे शरीर में फैली हुई नसें स्पष्ट दिखाई देने लगेंगी। मैं बार-बार नाना प्रकार के व्रत और पुण्यकर्म करूँगा, जिनसे मेरा परलोक सुधरेगा।॥7 1/2॥
 
‘By enduring the pain of hunger, thirst and heat, I will make my body so weak that the veins spread all over my body will be clearly visible. I will repeatedly observe various types of fasts and perform pious deeds that will improve my afterlife.॥ 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)