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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 147: बहेलियेका वैराग्य
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श्लोक 6-7h
श्लोक
12.147.6-7h
अद्यप्रभृति देहं स्वं सर्वभोगैर्विवर्जितम्॥ ६॥
यथा स्वल्पं सरो ग्रीष्मे शोषयिष्याम्यहं तथा।
अनुवाद
‘आज से मैं अपने शरीर को सब सुखों से वंचित कर दूँगा और इसे ऐसे सुखा दूँगा जैसे ग्रीष्म ऋतु में छोटा तालाब सूख जाता है।॥6 1/2॥
‘From today onwards I will deprive my body of all pleasures and dry it up just like a small pond dries up in the summer.॥ 6 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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