श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 147: बहेलियेका वैराग्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.147.2 
किमीदृशं नृशंसेन मया कृतमबुद्धिना।
भविष्यति हि मे नित्यं पातकं कृतजीविन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हाय! मुझ निर्दयी और मूर्ख ने कौन-सा पाप किया है? मैंने अपना जीवन ऐसा बना लिया है कि मैं प्रतिदिन पाप करता रहूँगा।॥2॥
 
'Alas! What sin have I, the cruel and foolish, committed? I have made my life such that I will keep committing sins every day.'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)